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विश्व अस्थमा दिवस 3 मई, 2022

By Dr. Inder Mohan Chugh in Pulmonology

May 18 , 2022 | 3 min read

विश्‍व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की अस्थमा रिपोर्ट के अनुसार, 339 मिलियन से अधिक लोग अस्थमा से पीड़ित हैं, जिससे घरघराहट, सांस फूलना, सीने में जकड़न और खांसी हो सकती है। अस्थमा एक ऐसी स्थिति है जिसमें वायुमार्ग संकरा हो जाता है, सूज जाता है और अतिरिक्‍त बलगम पैदा होता है। इससे सांस लेने में कठिनाई हो सकती है और खांसी, घरघराहट और सांस लेना मुश्किल हो सकता है। कुछ लोगों के लिए अस्थमा सिर्फ एक छोटी सी मुश्किल है।

इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी एंड स्लीप मेडिसिन विभाग, मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, शालीमार बाग, नई दिल्ली के निदेशक और प्रमुख, डॉ. इंदर मोहन चुघ का कहना है कि “अस्थमा की दवा सही ढंग से लेने और उपचार प्‍लान का पालन करने से रोजाना की बढ़त का बेहतर प्रबंधन और अस्‍थमा को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। इनहेलेशन थेरेपी अस्थमा के तीव्र और दीर्घकालिक प्रबंधन का आधार है।"

इनहेलर के उपयोग के संबंध में भारत में कई भ्रांतियां और गलत प्रथाएं प्रचलित हैं। ये उपचार के अनुकूल व्यवहार और अनुपालन को प्रभावित करती हैं। इनहेलेशन उपचार के बारे में मिथकों से इन वितरण प्रणालियों का उचित इस्‍तेमाल कम होने के कारण रुग्णता और मृत्यु दर पर प्रभाव पड़ता है।

उपचार के लिए इनहेलर के इस्‍तेमाल के बारे में जागरूकता की कमी है। भारत में रोगियों में यह गलत धारणा है कि इनहेलर के नियमित इस्‍तेमाल की आदत पड़ जाती है और यह एक लत बन जाती है और उनकी जेब को छेदती रहेगी। डॉ. चुघ का कहना है कि इसे अन्यथा साधारण ओरल नुस्खे वाले इलाज से अतिरिक्‍त खर्च समझा जाता है।

लोग इसके इस्तेमाल को लेकर आशंकित भी हैं क्योंकि उन्हें इसके दुष्‍प्रभाव का अंदेशा होता है। वे सोचते हैं कि अस्थमा के इलाज के लिए इस्‍तेमाल होने वाले स्टेरॉयड खतरनाक हैं और इससे नाक और गले में सूखापन हो सकता है। वैकल्पिक चिकित्सा यानी ओरल पिल्‍स की उपलब्धता बेहद सुविधाजनक विकल्प लगती है और रोगी को भरोसा दिलाया जाता है कि उसने सही इलाज कराया है। रोगी को इनहेलर तकनीक कठिन लग सकती है और यह भरोसा नहीं है कि खुराक और दवा उसके फेफड़ों तक पहुंचती हो क्योंकि इसमें कोई स्वाद नहीं है। इसके अलावा, इनहेलर का इस्‍तेमाल करना और ले जाना मुश्किल होता है।

डॉ. चुघ विस्तार से बताते हैं कि इससे एक बड़ा सामाजिक कलंक जुड़ा हुआ है। इसका कारण यह है कि आप इनहेलर का इस्‍तेमाल करने वाले किसी व्‍यक्ति को हांफते और सांस लेने के लिए संघर्ष करते हुए पाते हैं। यह स्थिति तब और मुश्किल हो जाती है जब शादी के योग्‍य कोई लड़की अस्थमा से पीड़ित हो और इनहेलर का इस्‍तेमाल कर रही हो। रोगियों को शिक्षित करने और परामर्श देने के लिए समय की कमी भी मौजूदा समस्याओं को बढ़ाती है।

लोग यह भी मानते हैं कि अस्थमा वास्तविक नहीं है और यह सब सिर में है जबकि तथ्य यह है कि भावना और तनाव अस्थमा को बढ़ाते हैं। एक बार लक्षण कम हो जाने पर लोग इनहेलर लेना बंद कर देते हैं और जब अंतर्निहित सूजन के कारण वे लक्षण फिर से विकसित होते हैं, तो उन्हें लगता है कि इनहेलर ने ठीक से काम नहीं किया है और ये बेकार हैं।

बाल रोगियों के बीच भी मिथक काफी प्रचलित हैं और माता-पिता मानते हैं कि इनहेलर और इनहेल्ड स्टेरॉयड इस्‍तेमाल करने से बच्चे की बढ़त और उनकी बुद्धि के स्तर पर असर पड़ सकता है। वे यह भी मानते हैं कि अस्थमा से पीड़ित बच्चों को खेलना नहीं चाहिए। इसलिए अस्थमा के प्रबंधन पर विभिन्न शैक्षिक कार्यक्रम आयोजित किया जाना आवश्‍यक है।

डॉ. इंदर मोहन चुघ ने इस बात पर भी जोर दिया कि रोगियों को यह समझना चाहिए कि अस्थमा कोई बड़ी बात नहीं है। यह एक ऐसा रोग है जिसे नियंत्रित किया जा सकता है और रोगी भरपूर जीवन जी सकता है। लोगों को अस्थमा को स्वीकार करना शुरू करना और इससे डरना नहीं चाहिए। इसकी बजाय उन्हें सर्वोत्तम श्रेणी की इनहेलेशन थेरेपी को अपनाना चाहिए और इनहेलर के इस्‍तेमाल का स्मार्ट विकल्प अपनाना चाहिए।


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